Sarhad Ki Dono Or Chehkta Chaman Rahe

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सरहद की दोनों ओर चहकता चमन रहे,
मुझ से कहीं अधिक तेरे घर में अमन रहे ।
सूरों की तरह लफ़्ज़ भी सरहद से हैं परे,
आवाम दोनों ओर सदा गुलबदन रहे ।
सरहद ने क्या दिया है ख़ूं-औ-अश्क़ छोडकर ?
हर दिल में इसी आस का आवागमन रहे ।







