Nadi Kinare Pani Mein Ladki Ek Nahati Hai

Posted on 03 Dec 2010 | Author: | Ghazals & Lyrics, Shayari E Husn

नदी किनारे पानी में लड़की एक नहाती है
देख देख के अपने आप को शरमाती लाजियाती है

खेल रही है वो पानी से और उससे पानी
ऐसा लगता है जलपरियों की कोई रानी
गोरे गोरे बदन से उसके निकल रहे हैं शोले
डोल रही है उसकी जवानी खाती है हिचकोले

मस्त जवानी से नदिया के पानी को गरमाती है
नदी किनारे पानी में लड़की एक नहाती है

पानी उसके बदन को चूमे, चूम चूम कर झूमे
मछली की तरहा तैरे वह इधर उधर भी घूमे
नागिन की तरहा पानी की लहरों पे लहराए
पेड़ पे जैसे कोई डाली फूलों की बलखाए

पानी ले ले कर हाथों में नदिया का उछ्लाती है
नदी किनारे पानी में लड़की एक नहाती है

भीगी साड़ी के पीछे से झाँक रहा है जोबन
सोच रही है देखे कोई आकर उसका यौवन
कोई मुझको अंग लगाए कोई मुझसे खेले
अंग अंग छुए वह मेरा और बाहों में ले ले

तन को थिरकाती है अपने और मन को बहलाती है
नदी किनारे पानी में लड़की एक नहाती है

By Satish Shukla “Raqeeb”




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3 Responses to "Nadi Kinare Pani Mein Ladki Ek Nahati Hai"
  1. r sahay says:

    nadi kinaare ek ladki nahathi hai ,ek romantic shayari hai ,accha laga

  2. Archana singh says:

    shayri is a very beautyful and line is a good

  3. raj virk says:

    it is well

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